भारत और सेशेल्स का रिश्ता सिर्फ कूटनीति नहीं, भरोसे और भविष्य का है: PM नरेंद्र मोदी

India Seychelles Press Meet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में हैदराबाद हाउस में भारत और सेशेल्स के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेशेल्स के राष्ट्रपति चुने जाने पर मैं राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को 140 करोड़ भारतीयों की ओर से हार्दिक बधाई देता हूं। राष्ट्रपति के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है, उनकी यह यात्रा ऐसे शुभ वर्ष में हो रही है जब सेशेल्स का 50वां स्वतंत्रता दिवस और हमारे राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। मुझे विश्वास है कि यह हमें निरंतर नई ऊंचाइयां छूने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
PM मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल राजनयिक रूप तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर की लहरें सदियों से हमारे लोगों को जोड़ती आई है… भारत और सेशेल्स सिर्फ़ भूगोल से ही नहीं, बल्कि इतिहास, भरोसे और भविष्य के लिए साझा विजन से भी जुड़े हुए हैं। हमारा नाता कल, आज और आने वाले कल का है। एक मैरिटाइम पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार के रूप में सेशेल्स भारत के महासागर विज़न का अभिन्न अंग है। हमारा सहयोग जल, थल और नभ को समाहित करता है। आज की चर्चाओं में हमने इस साझेदारी को और सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। अपने आर्थिक सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के लिए नए अवसरों की तलाश जारी रखने पर हम सहमत है। (India Seychelles Press Meet)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकल करेंसी में व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ हम फिनटेक और डिजिटल सॉल्यूशन में भी आगे बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे सभी प्रयास सेशेल्स की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर आधारित है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए हम 175 मिलियन डॉलर के स्पेशल पैकेज की घोषणा करने जा रहे हैं। यह पैकेज सोशल हाउसिंग, ई-मोबिलिटी, वोकेशनल ट्रेनिंग, स्वास्थ्य, रक्षा और मैरिटाइम सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ठोस परियोजनाओं का समर्थन देंगे। मुझे खुशी है कि सेशेल्स के सिविल सेवकों की भारत में ट्रेनिंग के लिए MoU किया जा रहा है, तकनीकी क्षेत्र में करीबी सहयोग से हम अपने सहयोग को एक भविष्यवादी दिशा दे रहे हैं। (India Seychelles Press Meet)

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्री पड़ोसी के रूप में ब्लू इकोनॉमी हमारे लिए एक स्वाभाविक सहयोग का क्षेत्र है। समुद्री अनुसंधान, क्षमता निर्माण, डेटा साझाकरण जैसे क्षेत्रों में हम भारत की विशेज्ञता सेशेल्स के साथ साझा करेंगे। साथ मिलकर हम न सिर्फ द्विपक्षीय सहयोग को, बल्कि हिंद महासागर के लिए एक साझा भविष्य को भी आकार देंगे। भारत-सेशेल्स संबंधों की सबसे बड़ी शक्ति हमारे लोगों से लोगों के संबंध हैं। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय ने सेशेल्स के सामाजिक और आर्थिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया है और हमारी मित्रता को मजबूत भी किया है। आज हमने पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और खेल के माध्यम से इन संबंधों को और सशक्त करने पर विचार-विमर्श किया।

वहीं सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने कहा कि हैदराबाद हाउस में आकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। जून में सेशेल्स और भारत अपने डिप्लोमैटिक संबंधों की गोल्डन जुबली मनाएंगे, जो सेशेल्स की आज़ादी की 50वीं सालगिरह के साथ होगी, जिसमें श्री मोदी को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर इनवाइट किया गया है। हमने अगले 5 सालों में सहयोग पर अपने साझा विज़न पर बात की है। हिंद महासागर के देशों के तौर पर, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता हमारे संबंधों के लिए बहुत जरूरी हैं। टूरिज्म सेशेल्स की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार है, और भारत एक बढ़ता हुआ बाजार है, जिसे बेहतर एयर कनेक्टिविटी से सपोर्ट मिल रहा है। (India Seychelles Press Meet)

सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के भारत दौरे को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि वे 10 फरवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। सेशेल्स पीएम के ‘महासागर’ विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे लंबे समय से संबंध हैं। यह एक ऐसी साझेदारी है जो अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हुई है। हमने छोटे और बड़े विकास प्रोजेक्ट, क्षमता निर्माण और ट्रेनिंग पहलों के मिश्रण के माध्यम से सेशेल्स के विकास में योगदान दिया है। समुद्री पड़ोसी होने के नाते, हम समुद्री डकैती, ड्रग्स की तस्करी, हथियारों और मानव तस्करी जैसी आम चुनौतियों का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि सुबह सेशेल्स के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करते हुए एक बैठक की।
10 एम्बुलेंस उपहार में देंगे: विक्रम मिस्री
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर्मिनी के लिए दोपहर के भोजन का आयोजन किया। राष्ट्रपति, राष्ट्रपति जी से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनके लिए राजकीय भोज का आयोजन किया जाएगा। कल वे आगरा जाएंगे। हम सेशेल्स को उनकी आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 10 एम्बुलेंस उपहार में देंगे। सिविल सेवकों के प्रशिक्षण, डिजिटल परिवर्तन में सहयोग और मौसम विज्ञान सेवाओं के क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन सहयोगों का मुख्य उद्देश्य महासागर अवलोकन, नीली अर्थव्यवस्था और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। मिस्री ने कहा कि ऊर्जा के मामले में हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित करना कि उन्हें उचित कीमत पर, भरोसेमंद और सुरक्षित आपूर्ति के माध्यम से पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहे। इसी उद्देश्य से ऊर्जा आयात को लेकर हमारी नीति पूरी तरह से संचालित होती है।
80-85 प्रतिशत तक आयात पर निर्भरता: विक्रम मिस्री
उन्होंने कहा कि आप जानते हैं कि तेल और गैस क्षेत्र में भारत एक शुद्ध आयातक देश है। हम एक विकासशील अर्थव्यवस्था हैं और हमें अपने संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सचेत रहना पड़ता है। जब किसी संसाधन के लिए 80-85 प्रतिशत तक आयात पर निर्भरता हो, तो ऊर्जा लागत के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता स्वाभाविक है। इसलिए यह आश्चर्यजनक नहीं है कि ऊर्जा के मामले में हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, ताकि उन्हें सही दाम पर, भरोसेमंद और सुरक्षित आपूर्ति के जरिए पर्याप्त ऊर्जा मिल सके। इसी आधार पर हमारी ऊर्जा आयात नीति तय होती है। उन्होंने आगे कहा कि हाल के सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने गंभीर अनिश्चितताओं का सामना किया है, जिसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता पर बड़ा असर पड़ा है। हम न तो किसी एक स्रोत पर निर्भर हैं और न ही होने का इरादा रखते हैं।
आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखें: विक्रम मिस्री
विक्रम मिस्री ने कहा कि बाजार की वस्तुनिष्ठ परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर स्रोतों का मिश्रण बदलना स्वाभाविक है। हमारा दृष्टिकोण यह है कि आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखें और जरूरत के अनुसार उनका विविधीकरण करें, ताकि स्थिरता सुनिश्चित हो सके। इसलिए मैं कहूंगा कि इस क्षेत्र में जितना अधिक विविधीकरण होगा, उतनी ही हमारी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जहां तक ऊर्जा की वास्तविक आपूर्ति का सवाल है, आप सभी इसे करीब से देखते हैं। आप जानते हैं कि वास्तविक सोर्सिंग का काम तेल कंपनियां करती हैं-चाहे वे सार्वजनिक क्षेत्र की हों या निजी क्षेत्र की। ये कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के आधार पर फैसले लेती हैं। वे किसी भी समय उपलब्धता, जोखिम और लागत का आकलन करती हैं। स्वाभाविक रूप से, इन सभी कंपनियों के पास अपनी आंतरिक जवाबदेही प्रक्रियाएं होती हैं और बाजार में उनकी कुछ फिड्यूशियरी (न्यासी) जिम्मेदारियां भी होती हैं।



