हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे 42 नक्सली, बाकी बचे नक्सलियों को आखिरी चेतावनी
Last Chance For Naxals: दक्षिण बस्तर और तेलंगाना-आंध्र क्षेत्र में नक्सल मोर्चे पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां 10 अप्रैल को बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना, वहीं 11 अप्रैल को सुरक्षाबलों ने कड़ा संदेश दे दिया। साथ ही कहा कि अब बचे हुए नक्सलियों के पास लौटने का आखिरी मौका है। 10 अप्रैल को नक्सलियों की सबसे खतरनाक सैन्य इकाई PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को बड़ा झटका लगा, जब इसके बटालियन इंचार्ज सोढ़ी केसा ने अपने 41 साथियों के साथ तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आत्मसमर्पण कर दिया।
कुल 42 नक्सलियों ने डाला हथियार
नक्सली अपने साथ 5 AK-47 समेत 36 हथियार लाए थे, जिन्हें उन्होंने जमा करा दिया। इसके अलावा 1007 जिंदा कारतूस और 800 ग्राम सोना भी बरामद किया गया है। सरेंडर करने वाले सभी नक्सली बस्तर के रहने वाले हैं, जिन पर कुल 1 करोड़ 93 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें 21 नक्सली PLGA बटालियन, 11 तेलंगाना स्टेट कमेटी और 10 दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में सक्रिय थे। लगातार बढ़ते दबाव और सुरक्षाबलों की रणनीति के चलते ये नक्सली पहले ही बस्तर छोड़ चुके थे और पिछले एक हफ्ते से तेलंगाना पुलिस के संपर्क में थे। आखिर में उन्होंने तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सोढ़ी केसा करीब 30 साल से नक्सली गतिविधियों में शामिल था, जो सुकमा जिले के एक गांव से निकलकर संगठन में बड़े पद तक पहुंचा था। सोढ़ी ने बस्तर के कई युवाओं को गुमराह कर उन्हें नक्सली संगठन में जोड़ा था। (Last Chance For Naxals)

आंध्र प्रदेश में भी 5 नक्सलियों ने डाले हथियार
आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में भी नक्सल संगठन को झटका लगा। 1 DVCM रैंक सदस्य, 3 ACM रैंक सदस्य और 1 कैडर सदस्य ने पुलिस अधीक्षक अमित बरदार के समक्ष आत्मसमर्पण किया। DVCM सदस्य पर 3 लाख रुपए और ACM सदस्यों पर 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित था। ये सभी नक्सली पहले दक्षिण बस्तर में सक्रिय थे और PLGA से जुड़े हुए थे। लगातार हो रहे आत्मसमर्पण के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों ने सख्त रुख अपनाया है। बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर पर अब गिनती के नक्सली ही बचे हैं। इन नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का आखिरी अवसर दिया जा रहा है। अगर वे अब भी हथियार नहीं डालते तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
तेलंगाना मूल के नक्सली भी निशाने पर
तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी अपील दोहराई है। उन्होंने बताया कि साल 2024 में तेलंगाना मूल के 125 लोग नक्सल संगठन में सक्रिय थे। अब यह संख्या घटकर सिर्फ 5 रह गई है। इनमें कुख्यात नक्सली गणपति भी शामिल है। कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर में सक्रिय महिला नक्सली रूपी भी तेलंगाना मूल की है। लगातार आत्मसमर्पण और सुरक्षाबलों के दबाव से नक्सल संगठन कमजोर होता दिख रहा है। बड़े कमांडरों का सरेंडर, इनामी नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटना और सक्रिय कैडर की संख्या में भारी गिरावट ये संकेत दे रहे हैं कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। (Last Chance For Naxals)

10 अप्रैल को हुए बड़े आत्मसमर्पण और 11 अप्रैल के अल्टीमेटम के बाद तस्वीर साफ है कि अब बचे हुए नक्सलियों के पास सिर्फ एक ही विकल्प मुख्यधारा में लौटना है। वरना आने वाले समय में सुरक्षाबलों की कार्रवाई और तेज होगी। सरकार और पुलिस दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह शांति का आखिरी अवसर है। लगातार हो रहे बड़े आत्मसमर्पणों ने नक्सल संगठन की कमर तोड़ दी है। PLGA बटालियन जैसे अहम ढांचे के टूटने और शीर्ष कमांडरों के हथियार डालने के बाद सुरक्षा एजेंसियों का संदेश साफ है- अब समय बदल चुका है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 31 मार्च को तय डेडलाइन के तहत बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित कर चुके हैं। उन्होंने 30 मार्च को संसद में इसकी घोषणा की थी। (Last Chance For Naxals)



