बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार को घेरा, बोले- गांवों में डॉक्टर ही नहीं मिल रहा तो मेडिकल कॉलेज खोलने का क्या औचित्य ?

MP Brijmohan Agarwal Statement: छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की कमी को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। दरअसल, राजधानी रायपुर में आयुष विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के दौरान बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सांसद ने कहा कि देशभर में मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले डॉक्टर की कमी है। प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटल में 1700 डॉक्टरों की कमी है। हमें इस बात पर गहन चिंतन करना होगा कि सरकारी सेवा में डॉक्टर आखिर मिलते क्यों नहीं। मेडिकल कॉलेज खोल देंगे, लेकिन डॉक्टर कहां से आएंगे। यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है।
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सांसद अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टर नहीं हैं। बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन ग्रामीणों को डॉक्टर नहीं मिलता। जब गांवों में डॉक्टर ही नहीं मिल रहा तो मेडिकल कॉलेज खोलने का औचित्य क्या है। डॉक्टरों की उपलब्धता पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि पूरे विश्व में एक तिहाई डॉक्टर हमारे पास हैं, फिर भी डॉक्टर की कमी है। मैं मानता हूं कि डॉक्टर और प्रोफेसर की कमी है, इसके बावजूद नए मेडिकल कॉलेज चलाना मुश्किल है, लेकिन निश्चित रूप से हम 5 नए मेडिकल कॉलेज चलाएंगे। देशभर का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि डॉक्टरों की कमी दूर हो सके।

मेडिकल कॉलेजों के विस्तार पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सबसे बड़ा फॉर्मूला मांग और आपूर्ति का नियम है। अगर आपूर्ति कम है तो मांग बढ़ेगी। मांग को कम करना है तो मेडिकल कॉलेज पहले ही खुल जाने चाहिए थे। 2003 में हमारी सरकार आई तो 1 से 10 और 2023 में 10 से 15 मेडिकल कॉलेज किए गए। अगर यह काम आजादी के बाद से लगातार होता तो आज यह समस्या नहीं आती। आज हम पौधा लगा रहे हैं, इसका लाभ इस कार्यकाल में शायद न मिले, लेकिन अगले कार्यकाल में जरूर मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सांसद की बातों से पूरी तरह असहमति नहीं जताई है, बल्कि कई बिंदुओं पर सहमति भी दी।
राज्य में डॉक्टरों की कमी समस्या: स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में डॉक्टरों की कमी एक वास्तविक समस्या है। कई जगहों पर सर्जरी और डिलीवरी जैसी सेवाएं प्रभावित हैं। सरकार मेडिकल शिक्षा में सुधार और हिंदी माध्यम को बढ़ावा दे रही है। मंत्री ने बताया कि नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। 14 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित होंगे। फिजियोथेरेपी, नैचुरोपैथी और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान शुरू किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाने की योजना पर काम जारी है। बस्तर में 36 लाख लोगों की घर-घर स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संसाधन दे सकती है, लेकिन सेवा भावना डॉक्टरों को दिखानी होगी।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
सांसद के बयान के बाद विपक्ष ने भी सरकार को घेर लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बस्तर समेत पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। आयुष्मान योजना के तहत भी निजी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि खुद सत्ताधारी दल के नेता ही सरकार की नाकामियां उजागर कर रहे हैं। पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि सत्ता पक्ष के ही वरिष्ठ नेता ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। मंत्री ने समस्या को स्वीकार किया, लेकिन समाधान की दिशा भी बताई। हालांकि विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता के तौर पर पेश किया। (MP Brijmohan Agarwal Statement)

एक तरफ सरकार मेडिकल कॉलेज बढ़ाकर आपूर्ति सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा डॉक्टरों की कमी जमीनी हकीकत बनी हुई है। छत्तीसगढ़ में करीब 1700 डॉक्टरों की कमी अब सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गंभीर नीति-स्तर की चुनौती बन चुकी है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना दीर्घकालिक समाधान हो सकता है, लेकिन तत्काल जरूरत ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की है। अब बड़ा सवाल यही है क्या सरकार तेजी से इस कमी को दूर कर पाएगी या यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक-जनसरोकार का विषय बनेगा ? (MP Brijmohan Agarwal Statement)



