जशपुर में 20 परिवारों की घर वापसी, धर्मांतरण के खिलाफ कानून को लेकर सियासी संग्राम तेज

Politics over Conversion: जशपुर जिले के कुनकुरी में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान करीब 20 परिवारों के 50 लोगों ने फिर हिंदू धर्म में वापसी की। यह आयोजन इन दिनों क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्वामी चिन्मयानंद बापू की ओर से सुनाई जा रही श्रीराम कथा के दौरान एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन परिवारों ने हिस्सा लिया, जो पहले किसी कारणवश ईसाई धर्म अपना चुके थे। कथा के दौरान व्यासपीठ पर इन परिवारों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में किसी भी लालच या दबाव में आकर धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान जय श्री राम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या देवी साय भी मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 तो पास करा लिया, लेकिन अब तक उसे कानून का रूप नहीं दे पाई है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी धर्म के मुद्दे का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति के लिए करती है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा घर वापसी को एक प्रोपेगेंडा के रूप में इस्तेमाल करती है। पहले धर्मांतरण कराया जाता है और फिर घर वापसी के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश होती है। (Politics over Conversion)
क्या है धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 ?
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अपने शासनकाल में कांग्रेस ने धर्मांतरण को संरक्षण दिया। भाजपा प्रवक्ता सुनील चौधरी ने कहा कि जल्द ही सख्त कानून लागू किया जाएगा और घर वापसी को समाज के लिए सकारात्मक कदम बताया। बता दें कि 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया गया था। इस विधेयक को राज्य में बढ़ते धर्मांतरण के मामलों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। इस कानून के तहत अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपए तक जुर्माना, पीड़ित अगर नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी वर्ग से हो तो 10 से 20 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक जुर्माना, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 25 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान है।

अगर कोई व्यक्ति पहले धर्मांतरण के मामले में सजा काट चुका है और फिर दोबारा दोषी पाया जाता है तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। यह विधेयक गृहमंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में पेश किया था। सरकार का कहना है कि 1968 के पुराने कानून को वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से अपर्याप्त मानते हुए यह नया कानून लाया गया है। इसका उद्देश्य जबरदस्ती, लालच या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। जशपुर में हुई घर वापसी की घटना ने जहां धार्मिक माहौल को चर्चा में ला दिया है, वहीं धर्मांतरण कानून को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। (Politics over Conversion)



