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छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस का आरोप-जानबूझकर काटे गए मुस्लिम वोटर्स के नाम, भाजपा ने किया पलटवार

Politics over Voter List: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। प्रदेश की अभनपुर विधानसभा में हजारों मतदाताओं के नाम विलोपित किए जाने के आरोपों के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए भाजपा पर अपने बेस वोटर्स, विशेषकर मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही पलटवार किया है।

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दरअसल, अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम काटे जाने से नाराज सैकड़ों प्रभावित मतदाता पूर्व विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू के नेतृत्व में हाथों में तख्तियां लेकर निर्वाचन आयोग पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजीव भवन में मीडिया के सामने अपनी बात रखी। कांग्रेस का दावा है कि अभनपुर विधानसभा से करीब 27 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इनमें बड़ी संख्या में उनके बेस वोटर शामिल हैं। (Politics over Voter List)

झूठी जानकारी देकर कटवाए गए नाम: कांग्रेस

पूर्व PCC चीफ धनेंद्र साहू ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) ने जानबूझकर झूठी जानकारी देकर मतदाताओं के नाम कटवाए हैं। उन्होंने कहा कि हमने जब खुद सत्यापन कराया तो शुरुआत में ही 914 ऐसे लोग मिले, जो जीवित हैं और अपने मूल स्थान पर निवास कर रहे हैं, इसके बावजूद उनके नाम काट दिए गए। इनमें करीब 70 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। यह कोई गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है। कांग्रेस ने भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि विरोधी दल के मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी दी गई। कवर्धा से आए कांग्रेस नेताओं ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाए जाने का दावा किया है।

क्या कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को गिरवी रखा है ?: BJP

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस के दावों को बेबुनियाद बताते हुए सवाल उठाया है कि कोई भी पार्टी खुद को किसी वर्ग का मालिक कैसे घोषित कर सकती है। देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस कैसे कह सकती है कि अल्पसंख्यक उनके बेस वोटर हैं? क्या उन्हें गिरवी रखा गया है? यह लोकतंत्र है, कोई किसी का गुलाम नहीं है। अगर किसी का नाम कटा है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया है, दोबारा आवेदन किया जा सकता है। कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। हम निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं। (Politics over Voter List)

निर्वाचन आयोग के पाले में गेंद

भाजपा ने इसे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि इसमें राजनीतिक रंग देना गलत है। फिलहाल यह पूरा मामला निर्वाचन आयोग के संज्ञान में है। कांग्रेस जहां इसे बड़ा चुनावी घोटाला बता रही है, वहीं भाजपा इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया और मानवीय त्रुटि करार दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हजारों मतदाताओं के नाम कटना सिर्फ तकनीकी या मानवीय गलती है ? या फिर इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति और सियासी खेल छिपा है ? इस विवाद के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में वोटर लिस्ट एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर आई है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग की जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद ही साफ हो पाएगा कि सच्चाई क्या है और आरोपों में कितना दम है।

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