नरेंद्र मोदी की आंखों में डर दिखता है…वे आंख में आंख नहीं मिला पाते हैं: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी

Rahul Gandhi on PM: लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान भाषण दिया। उन्होंने कहा कि मार्शल आर्ट की फाउंडेशन ग्रिप से शुरू होती है। लक्ष्य होता है कि ग्रिप मिलने के बाद चोक लेकर गला पकड़ लिया जाए। ऐसा करते समय जब खिलाड़ी के हाथ में चोक आ जाता है तो ये उसकी आंख में दिख जाता है। उसे समझ आ जाता है कि मैंने इसे पकड़ लिया है, जिसे पकड़ा जाता है वो 2-3 बार छूटने की कोशिश करता है, लेकिन फिर उसे भी पता चल जाता है- अब मैं गया।
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उन्होंने कहा कि बात वहीं खत्म हो जाती है और जिसे पकड़ा जाता है वो टैप कर ‘सरेंडर’ कर देता है। ग्रिप राजनीति में भी होती है। फर्क ये है कि मार्शल आर्ट में ग्रिप नजर आती है, लेकिन राजनीति में किसने-कहां ग्रिप ले रखी है, कौन कहां चोक ले रहा है- वो नजर नहीं आता। उसी तरह यहां नरेंद्र मोदी की आंख में डर दिखता है, वे आंख में आंख नहीं मिला पाते हैं। एपस्टीन केस में 3 मिलियन फाइल अभी आनी बाकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थितियों में भारत को नहीं बेचेंगे। वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। तो फिर उन्होंने भारत को क्यों बेच दिया ?, क्योंकि वे उनका गला घोंट रहे हैं। (Rahul Gandhi on PM)
उनकी गर्दन पर शिकंजा कस रखा है: राहुल गांधी
राहुल ने कहा कि PM मोदी ने भारत को इसलिए बेच दिया, क्योंकि उन्होंने उनकी गर्दन पर शिकंजा कस रखा है। दूसरा अगर आप हमारे बजट के केंद्र पर गौर करें, जैसा कि मैंने पहले कहा कि जूडो की तरह जहां पकड़ लगाई जाती है-हमारे रक्षा बजट के केंद्र में अदानी द्वारा गला घोंटा जा रहा है। इसीलिए मैं अदानी और अमेरिका में उनके खिलाफ चल रहे मामले के बारे में बात करना चाहता हूं, क्योंकि यह बजट के बिल्कुल केंद्र में है। मैं आर्थिक सर्वेक्षण देख रहा था। मुझे दो मुख्य बिंदु मिले। पहला हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहां भू-राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है। (Rahul Gandhi on PM)
यह एक अस्थिर दुनिया है: राहुल गांधी
उन्होंने कहा कि चीन, रूस और अन्य शक्तियां संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभुत्व को चुनौती दे रही हैं। दूसरा हम ऊर्जा और वित्तीय हथियारों के युग में जी रहे हैं। इसका मुख्य अर्थ यह है कि हम स्थिरता के युग से अस्थिरता के युग की ओर बढ़ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है और हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने भी यही कहा है, कि युद्ध का युग समाप्त हो गया है। वास्तव में, हम युद्ध के युग में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए हम अस्थिरता के युग में प्रवेश कर रहे हैं। डॉलर को चुनौती मिल रही है, और अमेरिकी वर्चस्व को भी चुनौती मिल रही है। हम एक महाशक्ति के युग से एक ऐसे नए युग की ओर बढ़ रहे हैं, जिसकी हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते। यह एक अस्थिर दुनिया है और आर्थिक सर्वेक्षण भी यही कहता है और मैं इससे सहमत हूं।



