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डिजाइन भारत के विरासत और भविष्य के विकास की कुंजी है: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

Union Minister Piyush Goyal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल गुजरात के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के 44वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए, जिन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डिजाइन केवल सौंदर्य शास्त्र के संबंध में नहीं है, यह एक नवाचार है, जिसका भारतीय विरासत पर प्रभाव रहा है और देश के विकास में भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि नए स्नातक विरासत और देश के भविष्य में सेतु का कार्य करेंगे। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री मोदी के विश्व के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजाइन इन इंडिया’ के आह्वान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नए स्नातक इसे वास्तविक रुप देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्या समाधानकर्ता, नवोन्मेषक और डिजाइनर के रूप में ये स्नातक विश्व के लिए कार्य करेंगे। 

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उन्होंने कहा कि आप विश्व के निर्माता होंगे, विश्व आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिक्ष से लेकर सेमीकंडक्टर तक के क्षेत्रों में डिजाइन के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए बताया कि चंद्रयान अंतरिक्ष मिशन का पहला चरण उपग्रह का डिजाइन था, जिसने इसकी सफलता को जन्म दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की डिजाइन क्षमताएं ऑडियो-विजुअल प्रौद्योगिकियों से लेकर गेमिंग, सततता, खिलौनों और अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शित होंगी। उन्होंने कहा कि डिजाइन में संभावनाएं अनंत हैं। हमें देश के 140 करोड़ लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशाल स्तर पर नवीन विचार और नवाचार सृजित करने होंगे। (Union Minister Piyush Goyal)

केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि समावेशी विकास और प्रगति हमारे देश का संकल्प और शक्ति है। अपनी क्षमताओं के साथ विश्व में सृजन करें, बदलाव लाएं और अपना प्रभाव बनाएं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के 44वें दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों के 430 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद समेत गवर्निंग काउंसिल के सदस्य उपस्थित थे। इधर, संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन के साथ मिलकर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा दियासलाई पर एक समर्पित चर्चा आयोजित की। (Union Minister Piyush Goyal)

कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा दियासलाई सिर्फ एक किताब नहीं है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों के लिए समर्पित एक आंदोलन है। दियासलाई एक किताब से कहीं बढ़कर – एक प्रेरक जीवन यात्रा का प्रमाण है। एक निजी किस्सा साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किताब पढ़ने से उन्हें अपने बचपन की यादें ताज़ा हो गईं। उन्होंने अपनी और सत्यार्थी की यात्रा के बीच एक अद्भुत समानता देखी- जहां कोविन्द कानपुर देहात के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन पहुंचे, वहीं सत्यार्थी की राह उन्हें एक साधारण गांव से नोबेल पुरस्कार के भव्य मंच तक ले गई। सत्यार्थी के अथक संघर्ष की सराहना करते हुए कोविंद ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बाल अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई भारत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया भर में फैली। (Union Minister Piyush Goyal)

उन्होंने माना कि रास्ता आसान नहीं था, फिर भी सत्यार्थी कभी नहीं डगमगाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सत्यार्थी का नोबेल पुरस्कार अपने पास रखने के बजाय राष्ट्र को समर्पित करने का निर्णय उनकी गहरी देशभक्ति का प्रतिबिंब है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति भवन में मेरे कार्यकाल के दौरान भी कैलाश मुझसे मिलने आते थे और उनके विचार हमेशा मुझे प्रेरित करते थे। उनकी आत्मकथा भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। श्रोताओं को संबोधित करते हुए राम बहादुर राय ने पुस्तक के साथ अपनी पहली मुलाकात पर विचार किया। उन्होंने साझा किया कि ‘दियासलाई’ प्राप्त करने के बाद उन्होंने खुद को काफी समय तक इसके कवर को देखते हुए पाया और महसूस किया कि पूरी कथा का सार इसमें समाहित था। (Union Minister Piyush Goyal)

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