Trending

मंगलवार 21 सितम्बर के वैदिक उपाय, आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए करें यह वैदिक उपाय

Whatsaap Strip

आज के उपाय : 22 सितम्बर 2021, दिन – मंगलवार।

ग्रह जन्य अनिष्ट निविघ्न बाधा- अशुभ

ये यो भ,भी भू ध,फ,ढ,भे. मा मी,मू,मे,मो,टा,टी, टू टे चू,चे,चो ला ली लू ले लो अ.

सिंह, मेष,धनु राशी वालो को उपाय करना हित कर होगा।

वर्जित – आंवला एवं इसके तेल, शेम्पू  व्यंजन उत्पाद का प्रयोग नहीं करे।

रोजगार,व्यापर या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व : भोजन, गुड़, मीठा या गुड़ खाकर, गरम दूध ग्रहण कर प्रस्थान करना चाहिए।

भोजन (ग्रहण या उपयोग करना चाहिए) :

दान पदार्थ- भोजन। कूष्मांड (कुम्हड़ा पेठा) न खायें क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।

कार्य के पूर्व : अग्निदेव की पूजा करके घृत का हवन करे तो उस हवि से समस्त धान्य और अपरिमित धन की प्राप्ति होती है।

ॐअग्निर्देवाय नम:।।

मेष, वृश्चिक राशी वाले बाधा नाश के लिए उपाय अवश्य करे।

यह भी पढ़ें : राशिफल 21 सितम्बर 2021 : मंगलवार को कैसा रहेगा आपका दिन, क्या कहती हैं आपकी राशि, जानें अपना राशिफल

कार्य के पूर्व  : सोमवार -अनिष्ट नाशक एवं सफलता के उपाय- कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर,अशुभ भाव में होने पर दोष के  अनिष्ट नाश हेतु अथवा चन्द्र ग्रह की प्रसन्नता/कृपा के लिए उपाय : किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे-

सर्व सिद्धिम,सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम: / स्वाहा।

आरोग्य सुख,सौभाग्य वृद्धि के लिए वैदिक उपाय

स्नान जल मे नदी या तीर्थ जल, पंचगव्य, दूध सफेद चंदन ,गोमूत्र,मिला कर स्नान करे।।

बाधा मुक्ति के लिए दान : दान –चावल,श्वेत पुष्प। जल दान –किसी भी कन्या को या सफ़ेद गाय, शिव मंदिर मे करे।

 दिन दोष आपत्ति निराकरण के लिएघर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं : खीर या दूध चावल ,दूध।

दिन दोष उपाय :- दर्पण (मिरर) में मुह देख कर प्रस्थान करे।

सफलता के लिए –आज के मंत्र

मंगलवार उपाय कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर,अशुभ भाव में होने पर दोष के अनिष्ट नाश हेतु अथवा मंगल  ग्रह की प्रसन्नता / कृपा के लिए उपाय (अविवाहित पुरुष-कन्यायों को एवं दाम्पत्य सुख के लिए पुरुष -स्त्री वर्ग  को अवश्य उपयोग करना चाहिए )

जिस मन्त्र का प्रयोग करे उसके  (मन्त्र के) अंत में अवश्य कहे – सर्व सिद्धिम,सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम:/स्वाहा।

यह भी पढ़ें : सुसाइड या मर्डर? : मठ में संदिग्ध हालत में मिली अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की लाश

सुख,सौभाग्य वृद्धि के लिए 

जटामांसी ,मौलश्री लाल पुष्पजल मे मिला कर स्नान करे।

दान-गुड, मसूरतांबा, लाल चन्दन युवा पुरुष, रक्षक,कनेर लाल पुष्प।

दान किसे दे : युवा अवश्यक -लाल बैल, युवा लड़का, राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मी,चौकीदार को दे।।

दिन दोष आपत्ति निराककरण के लिएघर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं : (What to take Before Departure from Home for Redressal of Day Blame Objection) (What to take Before Departure from Home for Redressal of Day Blame Objection)

कांजी

मंगल ग्रह गायत्री मंत्र पंचपाद-

(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना  -)

आपो ज्योति रस अमृतम |परो रजसे सावदोम  |

अङ्गारक, भौम, मङ्गल, कुज ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

ॐ अङ्गारकाय विद्महे भूमिपालाय धीमहि तन्नः कुजः प्रचोदयात् ॥

ॐ चित्रिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥

ओम अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि तन्नो भौम्य प्रचोदयात्

आपो ज्योति रसोंमृतम ,परो रजसे सावदोम।

यह भी पढ़ें : सोमवार 20 सितम्बर के वैदिक उपाय, आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए करें यह वैदिक उपाय

केतु

ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

 ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात् ॥

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः|

जैन धर्म मंत्र-

ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं ।

ॐ ह्रीं मंगल ग्रहारिष्ट निवारक श्री वासु पूज्यजिनेन्द्राय नम।

सर्व शांतिं कुरु कुरु स्वाहा।

मम (..अपना नाम ) दुष्ट ग्रह रोग कष्ट निवारणं सर्व शांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

मंगल––शीघ्र फलदायी

भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा।

वृष्टि कृद् वृष्टि हर्ता च पीडां हरतु में कुज: ।।

भूमि के पुत्रमहान् तेजस्वीजगत् को भय प्रदान करने वालेवृष्टि करने वाले

तथा वृष्टि का हरण करने वाले मंगल (ग्रहजन्य) मेरी पीड़ा का हरण करें ।। ब्रह्माण्डपुराण

वेद मन्त्र भौम-

ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।

 अपां रेतां सि जिन्वति।। (यजु. 3।12)

शाबर मन्त्र – (श्रद्धा आवश्यकशुद्धता सामान्य)

ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा,जन्ममरण का कट जावे फन्दा।

जन्म मरण का भागे कार,तो गुरू पावूं मंगलवार।

मंगलवार भारद्वाज गोत्र,रक्त वर्ण दस हजार जाप अवन्तिदेश।

दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल,वृश्चिक मेष राशि के गुरू को नमस्कार।

सत फिरे तो वाचा फिरे।पान फूल वासना सिंहासन धरै।तो इतरो काम मंगलवार जी महाराज करे।

 ओम फट् स्वाहा ll

Related Articles