रायपुर में कांग्रेस की फजीहत, शहर अध्यक्ष ने जारी की वार्ड अध्यक्षों की सूची, कुछ ही घंटों में PCC ने कर दिया निरस्त
Raipur Congress News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस संगठन के भीतर बड़ा विवाद सामने आया है। रायपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी 66 वार्ड अध्यक्षों की सूची को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। जानकारी के मुताबिक रायपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने शहर के 66 वार्डों में वार्ड अध्यक्षों की नियुक्ति की सूची जारी की थी। हालांकि यह सूची प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा और अनुमोदन के बिना जारी की गई थी। इसी कारण प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने आदेश जारी कर इस सूची को निरस्त कर दिया।
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इसे लेकर डिप्टी CM अरुण साव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। कांग्रेस में इस समय जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के बीच तालमेल नहीं है। कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और जनता भी अब कांग्रेस से दूरी बना रही है। वहीं भाजपा प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब भ्रष्टाचार के बंटवारे को लेकर विवाद होते थे और अब संगठन में शक्ति के बंटवारे को लेकर झगड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि झगड़ा कांग्रेस की संस्कृति नहीं, हक बनते जा रहा है। संगठन निर्माण में कांग्रेस बीजेपी की नकल तो कर सकती है, लेकिन सेवा, समर्पण और अनुशासन कभी नहीं ला सकती। (Raipur Congress News)

PCC चीफ दीपक बैज ने दी जानकारी
दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन में सभी नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होती हैं। उन्होंने कहा कि रायपुर शहर कांग्रेस की ओर से जारी सूची प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी की गई थी, इसलिए उसे निरस्त किया गया। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 15 अप्रैल तक सूची जारी करने का लक्ष्य था, जिसके चलते जल्दबाजी में यह सूची जारी कर दी गई। उन्होंने माना कि पीसीसी से अनुमति नहीं ली गई थी और प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, इसी वजह से सूची निरस्त करनी पड़ी। साथ ही उन्होंने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि वह पहले अपने संगठन के अंदरूनी मामलों पर ध्यान दे। (Raipur Congress News)

पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं विवाद
इस घटना ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक समन्वय और प्रक्रिया पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह के विवाद पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं। एक ओर जहां पार्टी नेतृत्व इसे प्रक्रिया संबंधी चूक बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे अंदरूनी खींचतान का परिणाम करार दे रहा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद से सबक लेकर संगठन को मजबूत करने में कितनी सफल होती है, क्योंकि ऐसे घटनाक्रम आगामी राजनीतिक रणनीति और जनविश्वास दोनों पर असर डाल सकते हैं। वैसे भी 5 साल सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा। इसका भी एक कारण गुटबाजी है।



