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छत्तीसगढ़ न्यूज : मांगों को लेकर कुष्ठ सेवाएं कर्मचारी दो अक्टूबर को करेंगे मौन सत्याग्रह

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रायपुर : छत्तीसगढ़ कुष्ठ सेवाएं कर्मचारी संघ के तत्वावधान में 20 वर्षों से लंबित पदोन्नति और वेतनमान में सुधार को लेकर संघ के आव्हान पर रायपुर स्थित आजाद चौक में महात्मा गांधी प्रतिमा पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मौन सत्याग्रह कर शासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे और मांग पूर्ति के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री,स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे।

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20 वर्षो में भी हमारी मांगो को शासन ने किया अनदेखा

जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ कुष्ठ सेवाएं कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष चितरंजन साहा एवं अन्य कर्मचारी नेता अरुण शुक्ला, अविनाश शर्मा,सतीश तिवारी, सुनील गुप्ता, भरत साहू,डी आर चक्रधारी ने बताया की छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से 20 वर्षो में भी हमारी मांगो को शासन ने अनदेखा किया है। धरना, प्रदर्शन, चर्चा, ज्ञापन की हमेशा उपेक्षा हुई और पदोन्नति के पद को डाइंग कैडर घोषित कर पदोन्नति से रोक दिया गया। जबकि शासन व स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी स्वयं स्वीकारते हैं कि इसमें त्रुटि हुई है। क्यों कि पदोन्नति के पद को डाइंग कैडर घोषित नहीं किया जा सकता। इस गलती को अब प्रशासन सुधारने के लिए तैयार नही है। जबकि प्रदेश में ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या 350 से ज्यादा नहीं है तथा पद भी प्रत्येक जिला व ब्लॉक में खाली पड़े हैं।

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उपेच्छित व्यवहार के कारण संघ का आव्हान

पीड़ित मानवता सेवा करने वाले कर्मचारियों को केंद्र के समान वेतनमान देने के तिवारी कमेटी के रिपोर्ट को भी नकार दिया गया है। जबकि, स्वास्थ्य संचालनालय से वेतनमान में सुधार की आवश्यकता है त्रुटि हुई है कर प्रतिपादित कर प्रस्ताव शासन को 1 वर्ष पूर्व ही भेज दिया गया वह वित्त विभाग में लंबित पड़ा है। शासन से हो रहे लगातार उपेच्छित व्यवहार के कारण संघ के आव्हान पर सभी कुष्ठ कर्मचारी महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर आजाद चौक में 3 घंटे का मौन सत्याग्रह कर शासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे। संघ ने शासन से अनुरोध किया है कि तत्काल पदोन्नत पद से डाइंग कैडर को विलोपित कर कुष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान करें।

गौरतलब है की “गांधी जी का सुंदर सपना,कुष्ठ मुक्त हो देश अपना” के नारे देनें वाले कुष्ठ कर्मचारियों के प्रति सरकार संवदेनशील नही है। न ही कुष्ठ रोग के प्रति कुष्ठ रोगी आज ग्लानिवश जीवन जी रहा है। कोई जीवन की सध्या बेला में निराश्रितो कि तरह पीड़ा भोग रहा है। तो किसी का रिश्ता टुटता है कोई कुष्ठ आश्रमों कि दहलिज के भीतर कराह रहे है। जीन कुष्ठ आश्रमो कि व्यवस्था सरकार ने की है वहा की बद-इतजामी का आलम यह है कि कुष्ठ रोगियों के सालो पुराने जख्म अभी भी हरे है। क्योकि कुष्ठ उन्मुलने कार्यक्रम में कुष्ठ कर्मचारीयों की उपेक्षा हमेशा से हो रही है। चाहे पदनाम हो चाहे वेतनमान हो चाहे ड्राइंग कैडर में लाना।

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