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Land acquisition authority: सुप्रीम कोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण दो माह में गठित करें, नहीं तो होगी कार्रवाई

Land acquisition authority: नई दिल्ली/रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को दो महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Authority) का गठन करने का सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा में प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया, तो राज्य सरकार के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Land acquisition authority
सुप्रीम कोर्ट

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यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ- जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची- ने राज्य के मुख्य सचिव को जारी किया है। कोर्ट ने यह फैसला सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी बाबूलाल द्वारा दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।

वर्षों से अधर में लटके मुआवजा और ब्याज से जुड़े मामले

याचिका में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में 2018 में नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू होने के बाद भी अब तक प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। इसके कारण मुआवजा और ब्याज से संबंधित सैकड़ों आवेदन लंबित हैं, जिससे हजारों किसान और भू-स्वामी प्रभावित हैं। (Land acquisition authority)

राज्य सरकार ने कोर्ट में यह जानकारी दी कि 28 अप्रैल 2025 को प्राधिकरण गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि यह प्राधिकरण कई वर्षों से निष्क्रिय बना हुआ है और किसानों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। (Land acquisition authority)

हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

इससे पहले बाबूलाल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह जनहित का मामला नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी।

भूमि स्वामियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राधिकरण के गठन में देरी का असर मुआवजे या ब्याज के दावे पर नहीं पड़ेगा। सभी प्रभावितों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि राज्य सरकार ने आदेशों का पालन किया या नहीं।(Land acquisition authority)

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